Tuesday, May 22, 2007

बीते लमहे

दर्द में भी यह लभ मुस्कुरा जाते हैं
बीते लमहे जबह याद आते हैं

आज भी जबह वोह मंज़र नज़र आते हैं
दील के वीरानियों को रोशन कर जाते हैं

दर्द में भी यह लभ मुस्कुरा जाते हैं
बीते लमहे जबह याद आते हैं

Friday, May 04, 2007

Justuju

जुस्तुजू जिसके थी उसको तो ना पाया हमने!
इस बहाने से मगर देखले दुनिया हमने!